Modern · 1890–1960
रूमानी ग़ज़ल के उस्ताद, जिनकी मुशायरों की अदायगी ने उन्हें जीवनकाल में ही दंतकथा बना दिया।
और पढ़ेंModern · 1896–1982
इलाहाबाद के प्रोफ़ेसर-शायर, जिन्होंने उर्दू ग़ज़ल को अपनी अलग, हिंदुस्तानी और ऐंद्रिक रंगत दी।
और पढ़ेंModern · 1837–1914
सुधारक शायर और आलोचक, ग़ालिब के शागिर्द, जिनकी "मुसद्दस" ने उर्दू शायरी को समाजी मक़सद की ओर मोड़ा।
और पढ़ेंModern · 1910–1975
उर्दू आज़ाद नज़्म के अग्रदूत, जिनकी कठिन, ऐंद्रिक आधुनिकता ने शायरी की ज़बान नई कर दी।
और पढ़ेंModern · 1928–2006
अजीब धुंधलकों और देर से आए पछतावों के शायर — "हमेशा देर कर देता हूँ मैं" — उर्दू और पंजाबी दोनों में।
और पढ़ेंModern · 1919–2001
हरिपुर के बेहद उपजाऊ रूमानी शायर, जिनकी गाई जा सकने वाली ग़ज़लें फ़िल्मों और गुलूकारों के ज़रिए दुनिया भर पहुँचीं।
और पढ़ेंModern · 1846–1921
उर्दू के महान व्यंग्यकार, जिन्होंने औपनिवेशिक आधुनिकता और बदलते समाज पर हास्य-व्यंग्य किया।
और पढ़ेंModern · 1875–1951
"इंक़लाब ज़िंदाबाद" के रचयिता, जिन्होंने स्वतंत्रता-सेनानी की आग को कोमलतम ग़ज़ल से जोड़ा।
और पढ़ेंModern · 1879–1941
ग़म के शायर, जिनकी ग़ज़लें पीड़ा को ही एक प्रकार का संगीत बना देती हैं।
और पढ़ेंModern · 1853–1934
"मयख़ाने के शायर": ख़ुमरियात की ग़ज़ल के उस्ताद, जिन्होंने ख़ुद कभी मय को हाथ नहीं लगाया।
और पढ़ेंModern · 1884–1956
लखनऊ के तीखे मूर्तिभंजक, जिन्होंने अपनी आवाज़ को ग़ालिब की छाया के सामने खड़ा किया।
और पढ़ेंModern · 1880–1951
आगरा के विपुल शायर और उस्ताद, जिन्होंने शास्त्रीय शिल्प को आधुनिक युग तक पहुँचाया।
और पढ़ेंModern · 1884–1936
गोंडा के सूफ़ी शायर, जिन्होंने ग़ज़ल को रहस्यमय प्रेम का पात्र बनाया।
और पढ़ेंModern · 1852–1933
लखनऊ में जन्मे हैदराबाद के आलिम-शायर, ग़ालिब की शरह और सुथरी क्लासिकी ग़ज़ल के लिए मशहूर।
और पढ़ेंModern · 1882–1926
उर्दू के कश्मीरी-हिन्दू उस्ताद, जिनकी देशभक्ति की नज़्मों ने एक पीढ़ी को जगाया।
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