Contemporary · 1931–2002
अमरोहा और कराची के बाग़ी शायर, अपनी मायूस शोख़ी और गुफ़्तगू-जैसी ग़ज़लों के लिए महबूब।
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शहरी भोर की एक काल्पनिक समकालीन शायरा — स्मृति और प्रवास पर मूल मीरास कलाम।
और पढ़ेंContemporary · 1952–1994
जदीद उर्दू ग़ज़ल की अग्रणी स्त्री-आवाज़, जिन्होंने मोहब्बत और औरत के मन को बेबाकी से लिखा।
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शायर, गीतकार और फ़िल्मकार, जिनकी सादा मगर तस्वीरों से भरी शायरी अदबी उर्दू और लोकप्रिय गीत के बीच पुल है।
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मशहूर अख़्तर ख़ानदान के शायर और गीतकार, अपनी साफ़, अक़्लपसंद शायरी और महबूब फ़िल्मी गीतों के लिए जाने जाते हैं।
और पढ़ेंContemporary · 1938–2016
दोहों और ग़ज़लों के शायर, जिनकी ज़बान बोलती हुई हिंदुस्तानी है — नर्म, सेक्युलर और चुपके से बाग़ी।
और पढ़ेंContemporary · 1947–1996
ग़म और अक़ीदत के शायर, रूमानी ग़ज़ल और कर्बला के नौहे — दोनों में समान अधिकार।
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हिंदुस्तानी मुशायरे की सरताज आवाज़, जिनकी सुलभ ग़ज़लों में वक़ार, शक और रोज़मर्रा की हिकमत है।
और पढ़ेंContemporary · 1945–2021
कराची के सुथरे लहजे के ग़ज़ल-गो, "वो हमसफ़र था" और ज़बान के इल्मी एहतिमाम के लिए याद किए जाते हैं।
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जदीद ग़ज़ल के बेचैन प्रयोगधर्मी, छह दशकों से उसकी ज़बान और क़वाइद को नए साँचों में ढालते हुए।
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निर्वासन और पूरब की एक काल्पनिक समकालीन शायरा — सम्बद्धता पर मूल मीरास कलाम।
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स्क्रीन की रोशनी वाली रात के एक काल्पनिक युवा समकालीन शायर — मूल मीरास कलाम।
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